गोपालगंज सिवान

गोपालगंज : थावे माँ भवानी मंदिर का रहस्य कौन नहीं जानता। इस मंदिर की मान्यता

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गोपालगंज: आईये आज जानते हैं थावे माँ भवानी मंदिर का रहस्य , बिहार के गोपालगंज जिले में थावे वाली माँ भवानी के मंदिर को कौन नहीं जानता। इस मंदिर की मान्यता है कि इस मंदिर में मां भवानी अपने भक्त रहषु भक्त के लिए असम के कामाख्या से थावे आईं और साक्षात दर्शन दिए। वहीं, थावे मां भवानी के दरबार में शारदीय नवरात्र के पहले दिन से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगी रहती है, आपको बता दें कि यहां सालों भर भक्तो की जबरदस्त भीड़ लगी रहती है, लेकिन चैत्र और शारदीय नवरात्र में पूजा करने का ज्यादा महत्व होता है,

मान्यता है कि इस जगह पर कभी घमंडी राजा मनन सिंह का राज्य हुवा करता था, राजा मनन सिंह के राज्य में मां भवानी के सबसे बड़े महान भक्त रहषु भगत जंगल में रहकर अपना खेती-बारी करता था. रहषु भगत दिन भर मां भवानी की आराधना में भी लगा रहता था. मान्यताओं के मुताबिक, मां का यह भक्त बाघ के गले में विषैले सांप की रस्सी बनाकर धान की दवरी करता था. रहशु भगत के इन कारनामें की चर्चा पूरे राज्य में फैल गई जैसे ही राजा मनन सिंह को इस बात का पता चला , उन्होंने रहषु भगत को गिरफ्तार करने का आदेश दे दिया.

बंदी बने रहशु भगत से राजा मनन सिंह ने मां भवानी को बुलाने का आदेश दिया. रहशु भगत ने राजा मनन सिंह को बहुत समझाया कि माँ भवानी को मत बुलाइये अगर माँ भावनी आयी तो सबकुछ बर्बाद हो जाएगा सब कुछ खत्म हो जाएगा कृपया करके आप इस बात को समझिये लेकिन राजा मनन सिंह नही माना फिर रहषु भगत ने मां की पूजा अर्चना शुरू कर दी. भक्त के आह्वाहन पर चारों तरफ काले बादल छा गए. पूरे राज्य में हर तरफ तेज आंधी पानी होने लगा. मां के परम भक्त रहशु भगत के आह्वाहन पर देवी मां कामरू कामख्या से चलकर पटना के पटन और सारण के आमी होते हुए गोपालगंज के थावे पहुंची. मां के प्रकट होते ही रहशु भगत का सिर फट गया और मां भवानी का हाथ सामने प्रकट हुआ. मां के प्रकट होने पर रहशु भगत को जहां मोक्ष की प्राप्ति हुई. वहीं मां के प्रकाश से घमंडी राजा मनन सिंह का सबकुछ खत्म हो गया.

आपको बता दें कि जिला मुख्यालय से 6 किलोमीटर दूर स्थित थावे माँ भवानी मंदिर में जो श्रद्धालु अपने सच्चे मन से मां भवानी की पूजा अर्चना करते हैं, उनकी सभी मनोकामनाए पूरी होती है,
यूपी और बिहार के अलावा नेपाल, बंगाल और झारखंड से भी लोगों का आने का सिलसिला लगा रहता है. यहां नवरात्र में पशु बलि देने की भी परम्परा है. लोग मां के दरबार में खाली हाथ आते हैं, लेकिन मां के आशीर्वाद से भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है,वहीं, श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन के द्वारा यहां व्यापक व्यवस्था की जाती है. यहां किसी को परेशानी न हो इसके लिए यात्री शेड बनवाया गया है. पीने के पानी की विशेष व्यवस्था की गई है. श्रद्धालुओं के लिए शौचालय का निर्माण कराया गया है.

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